रिपोर्ट | विशेष संवाददाता
90 के दशक के लोकप्रिय सुपरहीरो धारावाहिक शक्तिमान में निडर पत्रकार गीता विश्वास का किरदार निभाने वाली वैष्णवी मैकडोनाल्ड आज भी दर्शकों की यादों में ताजा हैं। पर्दे पर साहसी और न्यायप्रिय पत्रकार का किरदार निभाने वाली वैष्णवी की असल जिंदगी हालांकि चुनौतियों और संघर्षों से भरी रही है।
बचपन में पारिवारिक कलह का असर
वैष्णवी का बचपन पारिवारिक अस्थिरता के बीच गुजरा। माता-पिता के बीच लगातार विवाद होने से उन्हें कई बार ठिकाना बदलना पड़ा, जिसका सीधा असर उनकी पढ़ाई पर पड़ा। पढ़ाई में तेज होने के बावजूद वे नियमित रूप से स्कूल नहीं जा सकीं। कभी वैज्ञानिक बनने का सपना देखने वाली वैष्णवी को हालात ने कम उम्र में ही जिम्मेदारियों से रूबरू करा दिया।
आर्थिक तंगी और परिवार पर संकट
परिवार के हैदराबाद में बसने की कोशिश के दौरान उनके पिता अचानक लापता हो गए। इस घटना के बाद आर्थिक संकट गहरा गया और उनकी मां दोनों बेटियों को लेकर मुंबई आ गईं। शुरुआती दिनों में रहने और खाने जैसी बुनियादी जरूरतें भी चुनौती बन गईं। इस कठिन दौर ने वैष्णवी को मानसिक रूप से मजबूत तो बनाया, लेकिन परिवार के लिए यह समय बेहद पीड़ादायक रहा।
संघर्षों के बीच करियर की शुरुआत
मुश्किल हालात के बावजूद वैष्णवी ने हार नहीं मानी और धीरे-धीरे मनोरंजन जगत में कदम रखा। शुरुआत में उन्हें कई असफलताओं और अस्थिर अवसरों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने छोटे-मोटे काम करते हुए अपना सफर जारी रखा। बाद में फिल्मों से दूरी बनाकर उन्होंने टेलीविजन की ओर रुख किया, जो उनके करियर का निर्णायक मोड़ साबित हुआ।
‘शक्तिमान’ से मिली घर-घर पहचान
साल 1998 में प्रसारित हुए धारावाहिक शक्तिमान में गीता विश्वास की भूमिका ने वैष्णवी को व्यापक लोकप्रियता दिलाई। दर्शकों ने उनके आत्मविश्वासी और संवेदनशील पत्रकार के किरदार को खूब सराहा। इस शो की सफलता ने न सिर्फ उन्हें पहचान दिलाई, बल्कि उनके संघर्षों को भी नई दिशा दी।
संघर्षों से मिली सीख
वैष्णवी मैकडोनाल्ड की जिंदगी इस बात का उदाहरण है कि कठिन परिस्थितियां भी किसी के हौसलों को नहीं रोक सकतीं। पारिवारिक परेशानियों, आर्थिक अभाव और करियर की अनिश्चितताओं के बावजूद उन्होंने अपने दम पर पहचान बनाई और टीवी दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई।
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