मुंबई। बांद्रा पश्चिम स्थित कार्टर रोड प्रोमेनेड पर 35 एलईडी विज्ञापन बोर्ड लगाए जाने के विरोध में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बृहन्मुंबई महानगरपालिका) के एच/वेस्ट वार्ड के सहायक आयुक्त और महाराष्ट्र मेरीटाइम बोर्ड के मुख्य अधिकारी को कानूनी नोटिस भेजा गया है। यह नोटिस एनसीपी (एसपी) से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता फुरकान शेख की ओर से जारी किया गया है।
नोटिस में आरोप लगाया गया है कि सार्वजनिक प्रोमेनेड पर व्यावसायिक एलईडी होर्डिंग्स लगाना अवैध है और इससे न केवल सार्वजनिक स्थानों का व्यावसायीकरण बढ़ेगा, बल्कि लोगों की सुरक्षा और पर्यावरण पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। संबंधित अधिकारियों को सात दिनों के भीतर जवाब देने को कहा गया है।
पारदर्शिता पर उठे सवाल
नोटिस में यह भी कहा गया है कि इन एलईडी बोर्डों की स्थापना को लेकर किसी स्पष्ट नीति, अनुमति या सार्वजनिक जानकारी का अभाव है। आरोप है कि इस पूरे मामले में न तो पारदर्शिता बरती गई और न ही स्थानीय नागरिकों से कोई सार्थक जन-सलाह ली गई।
नोटिस में मांग की गई है कि यदि किसी प्रकार की अनुमति, लाइसेंस या स्वीकृति दी गई है तो उसकी प्रतियां सार्वजनिक की जाएं। साथ ही, जब तक उचित सार्वजनिक परामर्श प्रक्रिया पूरी न हो जाए, तब तक किसी भी नई स्थापना या चल रहे कार्य को रोका जाए।
पूर्व नगरसेवक ने भी जताई आपत्ति
पिछले सप्ताह बांद्रा के पूर्व नगरसेवक आसिफ जकरिया ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए बीएमसी आयुक्त और महाराष्ट्र मेरीटाइम बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को पत्र लिखकर काम तत्काल रोकने की मांग की थी।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इन होर्डिंग्स के लिए विधिवत एनओसी जारी की गई है? साथ ही, क्या तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजेड) नियमों, पर्यावरणीय मानकों, मैंग्रोव संरक्षण नियमों और वन विभाग के दिशा-निर्देशों के तहत आवश्यक मंजूरियां प्राप्त की गई हैं?
जकरिया के अनुसार, 22 दिसंबर 2025 को बीएमसी के एच/वेस्ट वार्ड लाइसेंस विभाग द्वारा दी गई अनुमति में इन जरूरी स्वीकृतियों का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, जिससे पूरी प्रक्रिया पर संदेह पैदा होता है।
नागरिकों में नाराजगी
लगभग 1.2 किलोमीटर लंबे समुद्र तट के किनारे बने कार्टर रोड प्रोमेनेड को शहर का एक प्रतिष्ठित सार्वजनिक स्थल माना जाता है। यह स्थान नागरिकों की पहल और सार्वजनिक धन के सहयोग से विकसित हुआ था।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रोमेनेड पर व्यावसायिक विज्ञापन बोर्ड लगाने से इसकी मूल पहचान और सौंदर्य प्रभावित होगा। कई नागरिक समूहों ने इसे सार्वजनिक स्थल के निजीकरण की दिशा में कदम बताया है।
फिलहाल, सभी की नजरें संबंधित विभागों के जवाब पर टिकी हैं। यदि सात दिन में संतोषजनक उत्तर नहीं मिला, तो मामले के कानूनी रूप से आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
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