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नगर निकाय चुनावों में महायुति की आंधी, मुंबई से महाराष्ट्र तक बीजेपी-शिवसेना का दबदबा।


मुंबई।
महाराष्ट्र की शहरी राजनीति के लिहाज़ से बेहद अहम माने जा रहे नगर निकाय चुनावों ने इस बार राज्य के सियासी समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। देश की सबसे धनी और प्रभावशाली नगरपालिका बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) समेत राज्य की अधिकांश महानगरपालिकाओं में बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) की अगुवाई वाली महायुति ने ज़बरदस्त जीत दर्ज करते हुए नया राजनीतिक इतिहास रच दिया है।
चुनाव नतीजों से साफ है कि शहरी मतदाताओं ने पहचान और भावनात्मक मुद्दों की बजाय विकास, बुनियादी ढांचे और स्थिर सरकार के पक्ष में वोट दिया है। मुंबई से लेकर पुणे, नागपुर और ठाणे तक महायुति का परचम लहराया है, जिससे विपक्ष को करारा झटका लगा है।
BMC में सत्ता का ताज महायुति के सिर
227 सदस्यीय बृहन्मुंबई महानगरपालिका में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन ने स्पष्ट बढ़त बनाते हुए सत्ता अपने नाम कर ली है। बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि शिवसेना (शिंदे गुट) ने भी मजबूत प्रदर्शन किया। लंबे समय बाद बीएमसी में सत्ता परिवर्तन ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है।
मराठी अस्मिता की राजनीति असरदार नहीं रही
चुनाव से पहले उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने मराठी मानुष और स्थानीय पहचान को केंद्र में रखकर साझा रणनीति बनाई थी, लेकिन नतीजे उनकी उम्मीदों के मुताबिक नहीं आए। शिवसेना (UBT) को सीमित सफलता मिली, वहीं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना कुछ ही सीटों तक सिमट गई। यह साफ संकेत है कि शहरी मतदाता अब विकास को प्राथमिकता दे रहा है।
29 में से 23 महानगरपालिकाओं पर महायुति का कब्जा
मुंबई के अलावा पुणे, पिंपरी-चिंचवड़, नागपुर, नवी मुंबई, ठाणे, कल्याण-डोंबिवली, जलगांव, सांगली, जालना और धुले जैसे बड़े शहरों में बीजेपी या उसके सहयोगी दल बहुमत के आंकड़े तक पहुंचे हैं। इसे महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में बीजेपी का अब तक का सबसे मजबूत प्रदर्शन माना जा रहा है।
पुणे में पवार परिवार का असर भी फीका
शरद पवार और अजित पवार के गुटों की मौजूदगी के बावजूद पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में बीजेपी ने निर्णायक जीत हासिल की। इन नतीजों ने यह दिखा दिया कि शहरी इलाकों में अब पारंपरिक राजनीतिक प्रभाव कमजोर पड़ रहा है।
नागपुर में मुख्यमंत्री की सियासी ताकत साबित
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के गृह नगर नागपुर में बीजेपी की शानदार जीत ने उनके नेतृत्व को और मज़बूती दी है। कांग्रेस को यहां बड़ी हार का सामना करना पड़ा, जिससे पार्टी की शहरी पकड़ पर सवाल खड़े हो गए हैं।
विकास बना वोटिंग का सबसे बड़ा आधार
मेट्रो परियोजनाएं, कोस्टल रोड, सड़कें, जल आपूर्ति और शहरी विकास से जुड़े काम मतदाताओं को प्रभावित करने में सफल रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकास नीति और ‘डबल इंजन सरकार’ का संदेश शहरी वोटरों के बीच असरदार साबित हुआ।
कांग्रेस का कमजोर प्रदर्शन चिंता का कारण
कांग्रेस कुछ गिने-चुने शहरों में ही बेहतर प्रदर्शन कर सकी। मुंबई जैसे बड़े महानगर में पार्टी का सीमित होना उसके लिए गंभीर चेतावनी माना जा रहा है।
छोटे दलों की सीमित भूमिका
AIMIM और अन्य छोटे दलों ने कुछ इलाकों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, लेकिन सत्ता के समीकरणों को प्रभावित करने की स्थिति में नहीं दिखे।
महायुति का मेयर तय
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने संकेत दिए हैं कि बीएमसी समेत अधिकांश नगर निगमों में महायुति के मेयर चुने जाएंगे। मुंबई में मेयर बीजेपी का होगा या शिवसेना का, इस पर अंतिम फैसला सहयोगी दलों की आपसी सहमति से लिया जाएगा।
राजनीतिक संदेश साफ
नगर निकाय चुनावों के नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में फिलहाल महायुति सबसे मजबूत ताकत बनकर उभरी है। विपक्ष के लिए यह नतीजे आत्ममंथन का संकेत हैं, जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए यह आने वाले वर्षों की बड़ी राजनीतिक लड़ाइयों की मजबूत नींव माने जा रहे हैं।

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