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लोनावला में जनविश्वास की जीत, फल विक्रेता से नगरसेविका बनीं भाग्यश्री जगताप।


महाराष्ट्र के नगर परिषद चुनावों में इस बार राजनीति ने एक नई और प्रेरणादायक तस्वीर पेश की है। लोनावला नगर परिषद में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए सत्ता हासिल की है। इस जीत के साथ ही एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने आम जनता का दिल जीत लिया है।
लोनावला की साधारण फल विक्रेता भाग्यश्री जगताप ने पार्षद पद का चुनाव जीतकर यह साबित कर दिया कि राजनीति अब केवल बड़े नामों तक सीमित नहीं रही। वर्षों से सड़क किनारे फल बेचकर अपने परिवार का पालन-पोषण करने वाली भाग्यश्री ने जनता के भरोसे और मेहनत के बल पर यह मुकाम हासिल किया है।
चुनाव परिणाम आने के महज कुछ घंटों बाद ही भाग्यश्री जगताप फिर से अपनी ठेली के साथ सड़क पर नजर आईं। नगरसेविका बनने के बावजूद उन्होंने अपने रोज़गार को नहीं छोड़ा। उनका कहना है कि जिस काम ने उन्हें सम्मानजनक जीवन दिया, उसे छोड़ना उनके संस्कारों के खिलाफ है। फल बेचते हुए वे लोगों से मुस्कराकर बात करती रहीं और जनता ने भी उन्हें अपनापन और सम्मान दिया।
चुनावी प्रचार के दौरान भी भाग्यश्री ने किसी बड़े वादे या दिखावे का सहारा नहीं लिया। सुबह फल बेचने और शाम को घर-घर जाकर लोगों से संवाद करना ही उनका प्रचार अभियान रहा। उन्होंने स्थानीय समस्याओं को समझा, सुना और समाधान का भरोसा दिलाया। यही सादगी और ईमानदारी उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी।
राजनीतिक गलियारों में भी यह चर्चा का विषय बना रहा कि एक साधारण फल विक्रेता को उम्मीदवार बनाकर एनसीपी ने आम जनता को राजनीति से जोड़ने का संदेश दिया है। भाग्यश्री जगताप की जीत को वंशवाद से हटकर जमीनी नेतृत्व की जीत के रूप में देखा जा रहा है।
आज लोनावला की यह नगरसेविका न सिर्फ एक जनप्रतिनिधि हैं, बल्कि उन हजारों आम लोगों की उम्मीद बन चुकी हैं, जो मेहनत, ईमानदारी और आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं। उनकी कहानी यह साबित करती है कि सच्ची सेवा भावना और जनता का विश्वास किसी भी व्यक्ति को ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।

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