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मिडिल ईस्ट तनाव के बीच LPG सप्लाई पर दबाव, सरकार ने बदले बुकिंग नियम।


नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। तेल और गैस की सप्लाई में आई बाधाओं का प्रभाव भारत तक पहुंचा है, जिसके कारण कई शहरों में एलपीजी सिलेंडर की मांग अचानक बढ़ गई है। कई जगहों पर गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं, वहीं कुछ स्थानों पर कालाबाजारी की शिकायतें भी सामने आई हैं।
हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि देश में एलपीजी की वास्तविक कमी नहीं है। सरकार के अनुसार समस्या का मुख्य कारण अफवाहों के कारण बढ़ी पैनिक बुकिंग और जमाखोरी है। इसी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने सिलेंडर बुकिंग से जुड़े नियमों में बदलाव किया है।
लोकसभा में सरकार ने दी जानकारी
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने लोकसभा में बताया कि वैश्विक ऊर्जा संकट के बावजूद भारत में तेल और गैस की सप्लाई जारी है। सरकार ने पारंपरिक समुद्री मार्गों के अलावा अन्य वैकल्पिक रास्तों से भी ऊर्जा संसाधनों का आयात शुरू कर दिया है, ताकि देश में आपूर्ति प्रभावित न हो।
उन्होंने कहा कि रोजाना गैस के कार्गो भारत पहुंच रहे हैं और सरकार लगातार स्थिति की निगरानी कर रही है।
सिलेंडर बुकिंग के नियमों में बदलाव
ऊर्जा संकट और बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार ने एलपीजी सिलेंडर बुकिंग की न्यूनतम समय सीमा में बदलाव किया है।
शहरी क्षेत्रों में अब एक सिलेंडर की डिलीवरी के बाद दूसरा सिलेंडर 25 दिन बाद ही बुक किया जा सकेगा।
ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में यह अवधि बढ़ाकर 45 दिन कर दी गई है।
इससे पहले देशभर में यह सीमा 21 दिन थी।
सरकार का मानना है कि इस बदलाव से अनावश्यक बुकिंग और जमाखोरी पर नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
रोजाना 50 लाख सिलेंडरों की डिलीवरी
पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक देश में एलपीजी की सप्लाई सामान्य बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान में देशभर में प्रतिदिन लगभग 50 लाख सिलेंडरों की डिलीवरी की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि कई जगहों पर पैनिक बुकिंग की वजह से मांग अचानक बढ़ गई है, जिससे अस्थायी दबाव की स्थिति बनी है।
सरकार ने लागू किए नए नियंत्रण उपाय
एलपीजी वितरण को व्यवस्थित करने के लिए सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं।
1. सिलेंडर बुकिंग अंतराल बढ़ाया गया
शहरों और ग्रामीण इलाकों के लिए अलग-अलग समय सीमा तय की गई है।
2. आपूर्ति को प्राथमिकता श्रेणियों में बांटा गया
घरेलू उपभोक्ताओं, सीएनजी, पीएनजी और आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।
3. OTP आधारित डिलीवरी व्यवस्था
अब उपभोक्ता के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी के बिना सिलेंडर की डिलीवरी नहीं होगी, जिससे फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी।
4. कालाबाजारी और जमाखोरी पर कार्रवाई
सरकार ने एजेंसियों और बिचौलियों पर कड़ी निगरानी शुरू कर दी है।
5. घरेलू गैस उत्पादन बढ़ाया गया
देश में एलपीजी उत्पादन को लगभग 28 प्रतिशत तक बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
कीमतों में भी हुआ बदलाव
ऊर्जा बाजार में बढ़ती लागत को देखते हुए सरकार ने हाल ही में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹60 और कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमत में ₹115 की वृद्धि की थी।
आयात के नए स्रोत तलाश रहा भारत
भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का करीब 60 प्रतिशत आयात करता है। पहले इसका बड़ा हिस्सा मध्य-पूर्व के समुद्री मार्गों से आता था। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने आयात के स्रोतों को विविध बनाने की रणनीति अपनाई है।
अब भारत रूस, ऑस्ट्रेलिया, नॉर्वे और अल्जीरिया जैसे देशों से तेल और गैस की खरीद बढ़ा रहा है। वर्तमान में भारत लगभग 40 देशों से कच्चा तेल आयात कर रहा है।
सरकार के अनुसार इन कदमों से देश में पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधनों की सप्लाई सुरक्षित बनी हुई है।

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