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दिल की धीमी धड़कन का नया इलाज: बिना तार वाला पेसमेकर बना आधुनिक चिकित्सा की बड़ी उपलब्धि ।


दिल की धड़कन का सामान्य और नियमित रहना स्वस्थ जीवन के लिए बेहद जरूरी है। लेकिन कुछ लोगों में दिल की धड़कन सामान्य से बहुत धीमी हो जाती है। इस स्थिति को चिकित्सा भाषा में Bradycardia कहा जाता है। जब दिल धीरे-धीरे धड़कता है तो शरीर में खून का प्रवाह कम हो सकता है, जिससे चक्कर आना, अत्यधिक थकान, कमजोरी या कभी-कभी बेहोशी जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।
डॉक्टर बताते हैं कि अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो मरीज को पेसमेकर लगाने की जरूरत पड़ सकती है। हाल के वर्षों में मेडिकल तकनीक में बड़ा बदलाव आया है और अब पारंपरिक पेसमेकर के साथ-साथ Leadless Pacemaker यानी बिना तार वाला पेसमेकर भी उपलब्ध हो गया है। इसे दिल के मरीजों के इलाज में एक महत्वपूर्ण तकनीकी प्रगति माना जा रहा है।
क्या है बिना तार वाला पेसमेकर
लीडलेस पेसमेकर आकार में बहुत छोटा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होता है, जो दिल की धड़कन को नियंत्रित करने में मदद करता है। यह लगभग एक छोटे कैप्सूल जितना होता है।
पारंपरिक पेसमेकर की तरह इसमें बाहर से दिल तक जाने वाली तारें नहीं होतीं। यह छोटा डिवाइस सीधे दिल के अंदर लगाया जाता है और वहीं से इलेक्ट्रिकल सिग्नल भेजकर दिल की धड़कन को सामान्य गति पर बनाए रखने में मदद करता है।
कैसे लगाया जाता है यह आधुनिक उपकरण
इस उपकरण को लगाने की प्रक्रिया पारंपरिक सर्जरी से काफी अलग और कम जटिल होती है। आमतौर पर डॉक्टर जांघ की नस के जरिए एक पतली कैथेटर ट्यूब को शरीर के अंदर डालते हैं। इसी ट्यूब की मदद से पेसमेकर को दिल तक पहुंचाया जाता है और दिल के दाहिने हिस्से में सावधानी से फिक्स कर दिया जाता है।
इस प्रक्रिया में बड़े चीरे की जरूरत नहीं पड़ती और कई मामलों में मरीज जल्दी रिकवर भी हो जाता है। इसलिए इसे कम इनवेसिव तकनीक माना जाता है।
पारंपरिक पेसमेकर से कैसे अलग
पहले इस्तेमाल होने वाले पेसमेकर में एक जनरेटर और उससे जुड़ी तारें होती थीं, जो दिल तक पहुंचाई जाती थीं। कई बार इन तारों में खराबी या संक्रमण की समस्या भी हो सकती थी।
लेकिन नए लीडलेस पेसमेकर में तार नहीं होने के कारण इन जटिलताओं का जोखिम काफी कम माना जाता है। इसके अलावा शरीर की त्वचा के नीचे अलग से डिवाइस रखने की जरूरत भी नहीं पड़ती, जिससे संक्रमण की संभावना कम हो जाती है।
किन मरीजों के लिए उपयोगी
हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक खासतौर पर उन मरीजों के लिए लाभदायक हो सकती है जिन्हें दिल की धीमी धड़कन यानी Bradycardia की समस्या होती है।
हालांकि हर मरीज के लिए यही तकनीक उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है। मरीज की उम्र, बीमारी की स्थिति और अन्य स्वास्थ्य कारकों को देखते हुए डॉक्टर ही तय करते हैं कि किस प्रकार का पेसमेकर बेहतर रहेगा।
भविष्य की तकनीक माना जा रहा
चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि बिना तार वाले पेसमेकर की तकनीक हृदय रोग के इलाज में बड़ा बदलाव ला सकती है। छोटा आकार, कम जटिलता और संक्रमण का कम खतरा इसे आधुनिक उपचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बनाते हैं।
हालांकि किसी भी चिकित्सा प्रक्रिया की तरह इसे लगाने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी होता है, ताकि मरीज के लिए सबसे सुरक्षित और सही उपचार चुना जा सके।

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