बच्चों की दवाओं की सुरक्षा को सख्त करने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। ड्रग्स कंसल्टेटिव कमेटी (DCC) ने सिफारिश की है कि सभी कफ सिरप को शेड्यूल-K की सूची से हटाया जाए। इसका मतलब है कि अब कफ सिरप सिर्फ डॉक्टर के पर्चे पर ही बिकेंगे। इससे गांवों में बिना लाइसेंस वाले केमिस्ट द्वारा कफ सिरप को सामान्य ओवर-द-काउंटर दवा की तरह बेचने की छूट खत्म हो जाएगी।
17 नवंबर 2025 को हुई DCC की बैठक में यह फैसला लिया गया। बैठक की अध्यक्षता ड्रग्स कंट्रोलर जनरल (इंडिया) डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी ने की। यह कदम मध्य प्रदेश में 20 से अधिक बच्चों की मौत के बाद उठाया गया है, जिनकी मौत जहरीले डाइएथिलीन ग्लाइकोल (DEG) वाले कफ सिरप के सेवन से हुई थी। इससे पहले 2022 में WHO ने भी भारत से निर्यात हुए ऐसे ही दूषित कफ सिरप को गाम्बिया में बच्चों की मौत से जोड़ा था।
बैठक में ड्रग्स रूल्स, 1945 के शेड्यूल-K की एंट्री 13 के तहत दी गई उस छूट की समीक्षा की गई, जिसके तहत 1,000 से कम आबादी वाले गांवों में गैर-लाइसेंसधारी दुकानदार घरेलू दवाएं—जैसे एस्पिरिन, पैरासिटामॉल, बाम, एंटासिड, ग्राइप वाटर और कफ सिरप—बेच सकते थे। समिति ने स्पष्ट रूप से इस छूट को हटाने का प्रस्ताव मंजूर कर दिया।
DCC अधिकारियों का कहना है कि यह कदम न सिर्फ बिना पर्चे कफ सिरप की बिक्री रोकने में मदद करेगा, बल्कि अवैध रूप से दवाएं बेचने वाली अनधिकृत दुकानों पर भी कड़ा नियंत्रण स्थापित करेगा।
बैठक में एक और अहम मुद्दा प्रोपाइलीन ग्लाइकोल का उपयोग रहा—यह एक हाई-रिस्क सॉल्वेंट है, जिसका प्रयोग बच्चों की सिरप दवाओं में बड़े पैमाने पर होता है। CDSCO ने बताया कि कई सिरप में DEG और EG जैसे जहरीले तत्व पाए गए हैं, जो निम्न-गुणवत्ता वाले प्रोपाइलीन ग्लाइकोल से आते हैं। चूंकि कई बाल-चिकित्सा दवाएं इसी सॉल्वेंट पर निर्भर करती हैं, इसलिए जोखिम लगातार बना हुआ है।
DCC ने CDSCO को निर्देश दिया है कि वह सभी हितधारकों से चर्चा कर यह पता लगाए कि कितनी दवाएं ऐसे उच्च-जोखिम वाले सॉल्वेंट से बन रही हैं और इनके सुरक्षित विकल्प क्या हो सकते हैं। समिति ने इस बात पर जोर दिया कि “हाई-रिस्क सॉल्वेंट से बनी दवाओं की पूरी जानकारी जुटाना तुरंत जरूरी है।”
यह कदम बच्चों की दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा और महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है।
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