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मीशो की 10 साल की अविश्वसनीय उड़ान: दो दोस्तों का स्टार्टअप बना 40,000 करोड़ का ई-कॉमर्स दिग्गज।


दिल्ली के दो युवाओं ने 10 साल पहले जो सपना देखा था, आज वह भारतीय ई-कॉमर्स की सबसे बड़ी कहानियों में शामिल हो चुका है। कभी जिसे लोग मजाक में लेते थे, आज वही कंपनी 40,000 करोड़ रुपये की वैल्यूएशन पार कर देश के बड़े-बड़े ई-कॉमर्स खिलाड़ियों को चुनौती दे रही है। यह कहानी है मीशो की—एक ऐसे प्लेटफॉर्म की, जिसने लाखों महिलाओं, छोटे व्यापारियों और युवाओं को पहली बार बिना पूंजी और बिना दुकान के अपना बिज़नेस शुरू करने का मौका दिया।

गृहिणियों को उद्यमी बनाने का सफर

2015 में IIT दिल्ली के दो दोस्तों—विदित आत्रे और संजीव बर्नवाल—ने मिलकर मीशो की शुरुआत की। उनका उद्देश्य सरल था: “सिर्फ मोबाइल हो तो बिज़नेस हो सकता है।”
इसी सोच ने मीशो को Amazon और Flipkart जैसे दिग्गजों से अलग पहचान दी। जहां बड़ी कंपनियां ब्रांडेड प्रोडक्ट्स पर केंद्रित रहीं, मीशो ने छोटे सेलर्स और घरेलू महिलाओं को अपना कारोबार खड़ा करने का मंच दिया।

बिना दुकान, बिना स्टॉक, बिना तकनीकी ज्ञान—मीशो ने सबको एक समान अवसर दिया। व्हाट्सऐप, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर सिर्फ लिंक शेयर करके बिक्री शुरू करने का आसान मॉडल लाखों महिलाओं की कमाई का साधन बन गया।

ग्राहकों को सस्ते दाम कैसे मिलता है फायदा?

मीशो पर सेलर्स को कमिशन नहीं देना पड़ता। इसी वजह से उत्पाद कम दाम पर मिलते हैं और विक्रेताओं की कमाई भी बढ़ती है।
आज:

  • 11 लाख से अधिक सेलर्स मीशो से जुड़े हैं
  • 700+ कैटेगरी में प्रोडक्ट उपलब्ध
  • हर महीने 10 करोड़ से ज्यादा ऑर्डर, जो इसकी चर्चा और लोकप्रियता का सबसे बड़ा प्रमाण है

संघर्ष से यूनिकॉर्न तक पहुंचने की कहानी

स्टार्टअप के शुरुआती दिनों में विदित आत्रे ने नौकरी छोड़कर मीशो को आगे बढ़ाने का जोखिम उठाया। असफलताएं भी मिलीं, लेकिन उन्होंने और संजीव ने हार नहीं मानी।
उनकी मेहनत रंग लाई और 2019 में फेसबुक ने मीशो में 200 करोड़ रुपये निवेश किए—जो किसी भी भारतीय स्टार्टअप के लिए बड़ी उपलब्धि थी।
2021 में मीशो ने यूनिकॉर्न क्लब (1 बिलियन डॉलर वैल्यूएशन) में प्रवेश किया। आज इसकी कीमत लगभग 40,000 करोड़ रुपये पहुंच चुकी है। दोनों संस्थापकों की संपत्ति अब अरबों में है।

शेयर बाजार में कदम: क्या होगी अगली बड़ी छलांग?

मीशो अब अपनी सफलता को नई दिशा देने के लिए 3 दिसंबर को शेयर बाजार में उतरने की तैयारी कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि IPO के सफल होने पर:

  • छोटे व्यवसायियों को और अवसर मिलेंगे
  • लाखों नए विक्रेताओं के लिए बाज़ार खुलेगा
  • डिजिटल इंडिया के ई-कॉमर्स सेक्टर में मीशो की पकड़ और मजबूत होगी

निष्कर्ष

दिल्ली के दो युवाओं का छोटा-सा आइडिया आज करोड़ों लोगों की जिंदगी बदल चुका है।
मीशो की यात्रा साबित करती है कि “हौसला बड़ा हो तो मंजिलें खुद रास्ता बना लेती हैं।”
अब नजरें इसके IPO पर हैं, जो भारतीय स्टार्टअप इतिहास में एक और बड़ा अध्याय जोड़ सकता है।

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