मुंबई: महानगर की सरकारी नौकरी का सपना दिखाकर 43 बेरोजगारों से करीब ₹33 लाख की ठगी करने का मामला सामने आया है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका में नौकरी दिलाने का झांसा देकर पैसे लेने के आरोप में मुंबई पुलिस ने एक महिला कर्मचारी, उसके बेटे और एक सिविक इंजीनियर समेत चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता अनिलकुमार कृष्णराव गोंजारी (50), जो सांगली जिले के निवासी हैं और कृषि के साथ मोटर व्यवसाय से जुड़े हैं, ने 31 दिसंबर 2025 को शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपियों ने बीएमसी के एल वार्ड के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क होने का दावा करते हुए नौकरी दिलाने का भरोसा दिया।
रिश्तेदार के जरिए हुआ संपर्क
जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी माया नरेंद्र चव्हाण नवी मुंबई के उलवे इलाके में रहती हैं। जून 2024 में गोंजारी की मुलाकात अपने रिश्तेदार के घर पर चव्हाण और उसके बेटे प्रथेमेश से हुई थी। आरोप है कि चव्हाण ने बीएमसी में विभिन्न पदों पर भर्ती का दावा करते हुए कथित विज्ञापन की फोटो भी भेजी और कई लोगों को आवेदन के लिए प्रेरित किया।
बाद में गोंजारी अपने परिचितों और रिश्तेदारों को लेकर नवी मुंबई और कुर्ला स्थित एल वार्ड कार्यालय पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात अन्य आरोपियों से कराई गई। शिकायत में यह भी कहा गया कि बैठक के दौरान एक व्यक्ति ने सहायक अभियंता का पहचान पत्र पहनकर खुद को अधिकारी बताया, जिससे उम्मीदवारों का भरोसा और बढ़ गया।
पद के हिसाब से तय की गई रकम
एफआईआर के मुताबिक आरोपियों ने बिना लिखित परीक्षा के नौकरी दिलाने का भरोसा दिया और अलग-अलग पदों के लिए रकम तय की।
चपरासी पद: ₹1.70 लाख
क्लर्क पद: ₹1.80 लाख
आरए क्लर्क व हेड क्लर्क: ₹2.50 लाख
आवेदन के समय ₹60 हजार से ₹1 लाख तक एडवांस मांगा गया।
डिजिटल और नकद मिलाकर ₹33 लाख की वसूली
शिकायतकर्ता ने पहले सात उम्मीदवारों के लिए पैसे ट्रांसफर किए, लेकिन भरोसा बढ़ने पर कुल 43 लोगों से रकम इकट्ठा कर आरोपियों को दी। पुलिस के अनुसार ₹24.68 लाख बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए, जबकि ₹8.30 लाख नकद दिए गए। उम्मीदवारों को भरोसा दिलाने के लिए कुछ लोगों का घाटकोपर के एक निजी अस्पताल में मेडिकल परीक्षण भी कराया गया।
जून 2025 में आरोपी महिला ने ₹500 के स्टांप पेपर पर नोटरी शपथपत्र बनाकर ₹33 लाख प्राप्त करने और 10 जुलाई 2025 तक रकम लौटाने का वादा किया था, लेकिन तय समय पर पैसे वापस नहीं किए गए।
फर्जी खातों के इस्तेमाल की भी आशंका
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ बैंक खाते ऐसे लोगों के थे जिन्हें कथित ठगी की पूरी जानकारी नहीं थी। पुलिस अब पैसों के ट्रेल और अन्य सहयोगियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
धोखाधड़ी और जालसाजी के तहत केस दर्ज
कुर्ला पुलिस ने माया चव्हाण, उसके बेटे प्रथेमेश, सुरेंद्र गुरव, सिविक इंजीनियर राहुल जाधव और अन्य सहयोगियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ी धाराओं में मामला दर्ज किया है। मामले की आगे जांच जारी
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