मुंबई के अपराध इतिहास का साक्षी रहा क्राइम ब्रांच का प्रतिष्ठित भवन अब जल्द ही इतिहास बन जाएगा। धोबी तालाव स्थित पुलिस मुख्यालय परिसर में मौजूद यह पुरानी दो-मंज़िली इमारत अपनी जर्जर हालत के चलते जल्द ही गिरा दी जाएगी। इसकी जगह पर एक अत्याधुनिक छह मंज़िला भवन खड़ा किया जाएगा।
1909 से जुड़ी विरासत, अब अंतिम दौर में
ब्रिटिश काल में 1909 में निर्मित यह पत्थरों की इमारत पिछले 115 वर्षों से मुंबई क्राइम ब्रांच का संचालन केंद्र रही है। इसी भवन में देश और शहर के कई कुख्यात अपराधियों और आतंकियों से पूछताछ की गई—
26/11 हमले का आरोपी अजमल कसाब, अंडरवर्ल्ड सरगना अबू सलेम, अबू जुंदाल, गैंगस्टर अरुण गवली और 1993 ब्लास्ट केस में अभिनेता संजय दत्त—सभी इस इमारत के भीतर पूछताछ कक्षों में घंटों बैठे रहे।
ढांचा हुआ खतरनाक, मरम्मत अब संभव नहीं
हालांकि सामने का हिस्सा अभी भी मजबूत दिखता है, लेकिन पीछे की लोहे की बीमें पूरी तरह जंग खा चुकी हैं। संरचनात्मक ऑडिट में भवन को ‘खतरनाक’ घोषित करते हुए तत्काल गिराने की सिफारिश की गई है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया,
“मुंबई पुलिस बल का दायरा बहुत बढ़ चुका है। मुख्यालय में जगह की भारी कमी है। चूंकि यह इमारत अब मरम्मत के लायक नहीं बची, इसलिए इसे ध्वस्त कर नई आधुनिक इमारत बनाने का निर्णय लिया गया है।”
छह मंज़िला नया भवन: कई आधुनिक सुविधाओं से लैस
नई प्रस्तावित इमारत में होंगे—
- क्राइम ब्रांच के सभी कार्यालय
- अत्याधुनिक सीसीटीवी मॉनिटरिंग सेंटर
- प्रशासनिक विभाग
- बड़े कॉन्फ्रेंस एवं मीटिंग हॉल
निर्माण पूरा होने तक क्राइम ब्रांच यूनिट्स को मुख्यालय परिसर की नई प्रशासनिक इमारत में अस्थायी रूप से स्थानांतरित किया जाएगा।
कैसे बनी क्राइम ब्रांच? पीछे है आजादी के आंदोलन की कहानी
8 जून 1909 को लोकमान्य तिलक की देशद्रोह मामले में गिरफ्तारी के बाद पूरे देश में हुए गुस्से ने ब्रिटिश प्रशासन को हिला दिया था। राजनीतिक गतिविधियों पर नज़र रखने और खुफिया तंत्र मजबूत करने के लिए CID की स्थापना की गई।
क्रॉफर्ड मार्केट के पास स्थित एक पुरानी इमारत, जो कभी हज यात्रियों के लिए उपयोग होती थी, को CID के कार्यालय के लिए चुना गया।
यही इमारत आगे चलकर मुंबई क्राइम ब्रांच का मुख्यालय बनी और आज तक उसी रूप में कार्यरत रही।
1920 में CID से एक अलग स्पेशल ब्रांच बनी, लेकिन क्राइम ब्रांच यहीं से संचालित होती रही। देश के सबसे चर्चित मामलों की गवाह यह इमारत
यह भवन उन कई ऐतिहासिक केसों का प्रत्यक्ष साक्षी रहा है, जिनसे देश दहल उठा था—
- 26/11 मुंबई हमले में अजमल कसाब से पूछताछ
- 1993 मुंबई ब्लास्ट केस: संजय दत्त से राकेश मारिया की पूछताछ
- छोटा राजन, अरुण गवली, अबू सलेम, इजाज़ लकड़ावाला जैसे अपराधियों की जांच
- क्रिकेट सट्टेबाजी और मैच फिक्सिंग के हाई-प्रोफाइल मामले
एक युग का अंत
इस इमारत का ध्वस्तीकरण केवल एक पुरानी संरचना को हटाना नहीं है—यह मुंबई पुलिस की शताब्दी पुरानी क्राइम जांच परंपरा के एक अध्याय का अंत है। नई इमारत जहां भविष्य की जरूरतें पूरी करेगी, वहीं यह प्रतीक हमेशा याद दिलाएगा कि इसी जगह से देश के कई अहम मामलों की गुत्थियां सुलझी थीं।
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