मुंबई के घाटकोपर वेस्ट में एक साधारण-सी दिखने वाली कमर्शियल बिल्डिंग के भीतर से 166.37 करोड़ रुपए के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ GST इंटेलिजेंस (DGGI) की मुंबई ज़ोनल यूनिट ने 18 नवंबर को छापेमारी कर यह बड़ा धोखाधड़ी रैकेट पकड़ा, जिसमें 40 से अधिक फर्जी कंपनियाँ एक ही ऑफिस से चलाई जा रही थीं।
जाँच अधिकारियों के अनुसार, बाहर से यह ऑफिस आम व्यापारिक प्रतिष्ठान जैसा दिखता था, लेकिन अंदर यह ‘पेपर-बेस्ड सप्लाई चेन’ का बड़ा हब था—जहां कागजों पर ही माल की खरीद-फरोख्त दिखाकर करोड़ों का टैक्स क्रेडिट घुमाया जा रहा था। छापे में भारी मात्रा में दस्तावेज़ और उपकरण बरामद हुए, जिनका इस्तेमाल फर्जी कंपनियाँ बनाने और कागज़ी लेनदेन तैयार करने में किया जाता था। इनमें दर्जनों बैंक पासबुक, चेकबुक, डेबिट कार्ड, अनेक मोबाइल फोन, कई सिम कार्ड, लैपटॉप, डेस्कटॉप और डिजिटल स्टोरेज डिवाइस शामिल हैं।
19 नवंबर को DGGI ने 30 वर्षीय राजेंद्र बंसिलाल मौर्य को CGST एक्ट की धारा 69(1) के तहत गिरफ्तार किया। आरोप है कि मौर्य इसी ऑफिस से दर्जनों फर्जी GST रजिस्ट्रेशन तैयार करता था, झूठे खरीद-बिक्री बिल जारी करता था, ई-वे बिल और ई-इनवॉयस जनरेट करता था, और इनपुट टैक्स क्रेडिट को विभिन्न फर्जी लेयर्स के जरिए घुमाकर उसे वैध दिखाता था।
पूछताछ में मौर्य ने कथित रूप से स्वीकार किया कि उसने लगभग 40 फर्जी संस्थाओं का संचालन किया और सिर्फ व्हाट्सऐप पर मिले निर्देशों के आधार पर इनवॉयस जारी करता था, बिना यह जांचे कि वास्तव में किसी तरह का माल खरीदा या बेचा जा रहा है या नहीं। कई GST रजिस्ट्रेशन बाद में विभाग द्वारा अवैध पाए जाने पर रद्द भी कर दिए गए।
जांचकर्ताओं ने बताया कि आरोपी ने धोखाधड़ी छिपाने के लिए डमी मोबाइल नंबरों, बदले गए संपर्क विवरण और कई सिम कार्ड का इस्तेमाल किया, जिससे OTP प्राप्त कर वह रिटर्न फाइल करता था और फर्जी फर्मों का संचालन बिना पकड़े करता रहा। रैकेट को A, B, C और D लेवल में बांटा गया था, जिससे फर्जी ITC का ट्रेल छुपाया जा सके।
जांच में सामने आए कुछ लाभार्थी फर्मों में Auto-Kraft Moto Care Pvt Ltd (₹18.48 करोड़), Greentex International Pvt Ltd (₹16.5 करोड़), Royal Enterprises (₹7.62 करोड़), DS Diam (₹9.81 करोड़), Siddharth Enterprise (₹22 करोड़) और Mercy Enterprises (₹21.75 करोड़) शामिल हैं। शुरुआती आंकड़ा 166.37 करोड़ का है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि जांच गहराने पर यह रकम और बढ़ सकती है।
अधिकारियों ने बताया कि घाटकोपर का यह ऑफिस पूरे रैकेट का “सेंट्रल ऑपरेशन डेस्क” था, जहां से सभी रजिस्ट्रेशन, डिजिटल फाइलिंग और कंपनियों का संचालन होता था। पूरी व्यवस्था को असली व्यापार की तरह दिखाया गया, जबकि असल में कोई सामान कभी ट्रांसफर नहीं होता था—सब कुछ कागजों पर चलता था।
फिलहाल DGGI टीम जब्त किए गए डिजिटल डिवाइस खंगाल रही है, ताकि उन ग्राहकों का भी पता चल सके जिन्होंने जानबूझकर फर्जी ITC का फायदा उठाया। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि जांच कई राज्यों तक फैलेगी और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।
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