देश में साइबर अपराध का एक नया और खतरनाक रूप सामने आया है, जिसे ‘डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड’ कहा जा रहा है। महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने हाल ही में दो बड़े आरोपियों के वांटेड नोटिस जारी किए हैं। ये अपराधी पुलिस अधिकारी बनकर लोगों को डराते हैं और ऑनलाइन गिरफ्तार करने की धमकी देकर उनसे लाखों रुपये की ठगी करते हैं।
पहला वांटेड: पुलिस की वर्दी में धोखेबाज
पहला आरोपी, जो वीडियो में खुद को पुलिस अधिकारी बताता है, अवधूतवाड़ी पुलिस स्टेशन (यवतमाल) में FIR No. 1556/2025 के तहत वांटेड है। यह व्यक्ति पुलिस की वर्दी पहनकर वीडियो कॉल करता है और लोगों को धमकाता है कि उनके नाम पर मनी लॉन्ड्रिंग या अवैध गतिविधियों का मामला दर्ज है। डर का फायदा उठाकर यह तुरंत ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करने या बैंक विवरण साझा करने के लिए लोगों को मजबूर करता है। ध्यान रहे, कोई भी असली पुलिस अधिकारी वीडियो कॉल पर पैसे नहीं मांगता।
दूसरा वांटेड: मास्टरमाइंड की तलाश
दूसरा नोटिस देवेंद्र सत्यनारायण सैनी नामक आरोपी का है, जो राजस्थान का रहने वाला है और भारत के सबसे बड़े डिजिटल अरेस्ट रैकेट से जुड़ा माना जा रहा है। यह नोडल साइबर पुलिस स्टेशन, मुंबई में FIR No. 42/2025 के तहत वांटेड है। साइबर पुलिस इसकी तलाश में है और गिरफ्तारी में सहायता करने वालों के लिए पुरस्कार की घोषणा भी की गई है।
सुरक्षा और शिकायत के लिए संपर्क
यदि आपके पास इन आरोपियों से जुड़ी कोई भी जानकारी है, या आप इस प्रकार के फ्रॉड का शिकार हुए हैं, तो तुरंत यहां संपर्क करें:
मोबाइल: +91 9011146007
ईमेल: ig.cbr-mah@gov.in
डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड से बचने के तीन सबसे महत्वपूर्ण कदम
- कॉल तुरंत काट दें – यदि कोई व्यक्ति आपको डिजिटल अरेस्ट की धमकी दे, तो एक सेकंड भी बर्बाद किए बिना कॉल काट दें।
- OTP/PIN बिल्कुल न दें – कोई भी निजी जानकारी, बैंक डिटेल या OTP किसी को न दें।
- हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें – साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत कॉल करके घटना की रिपोर्ट करें।
यह नया साइबर फ्रॉड आम लोगों की मेहनत की कमाई को मिनटों में खाली कर सकता है। इसलिए सतर्क रहें, सचेत रहें और अपने परिवार व दोस्तों को भी इस खतरे के बारे में जरूर बताएं। जागरूकता ही इस डिजिटल अपराध से बचने का सबसे बड़ा हथियार है।
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