मुंबई |
मुंबई के ग्रांट रोड इलाके में सोमवार दोपहर एक निजी अस्पताल में आग लगने से कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई भी घायल नहीं हुआ। एहतियातन मरीजों, डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों सहित करीब 250 लोगों को अस्थायी रूप से बाहर निकाला गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दोपहर करीब 1.35 बजे भाटिया अस्पताल के सीटी-एमआरआई स्कैन यूनिट में आग भड़क उठी। मुंबई फायर ब्रिगेड (एमएफबी) के अनुसार आग अस्पताल की इस यूनिट में मौजूद बिजली की वायरिंग और इलेक्ट्रिकल सिस्टम तक ही सीमित रही।
आग की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की आठ दमकल गाड़ियां, विशेष उपकरणों और अन्य वाहनों के साथ मौके पर पहुंचीं। फायर कर्मियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लगभग 10–15 मिनट में आग पर नियंत्रण पा लिया, जिससे स्थिति को और बिगड़ने से रोका जा सका। पूरी तरह आग बुझाने का कार्य करीब 3 बजे तक पूरा कर लिया गया।
दमकल अधिकारियों ने बताया कि आग से प्रभावित यूनिट के ठीक ऊपर नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए बना एनआईसीयू (NICU) वार्ड स्थित है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए फायर ब्रिगेड और अस्पताल प्रशासन ने तुरंत सुरक्षा कदम उठाए।
धुएं के प्रभाव से बच्चों को बचाने के लिए दमकल वाहनों में लगे फोर्स्ड वेंटिलेशन सिस्टम की मदद से सीटी-एमआरआई यूनिट से धुआं बाहर निकाला गया। इसके साथ ही नवजात शिशुओं को एहतियातन एक वार्ड से दूसरे सुरक्षित वार्ड में अस्थायी रूप से स्थानांतरित किया गया, जिसे ‘स्टेज शिफ्टिंग’ कहा जाता है।
एक वरिष्ठ फायर अधिकारी ने बताया कि यदि धुआं बढ़ता, तो बच्चों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता था, इसलिए समय रहते यह कदम उठाया गया। त्वरित और समन्वित कार्रवाई के चलते बड़े पैमाने पर निकासी की जरूरत नहीं पड़ी।
प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण विद्युत शॉर्ट सर्किट या इलेक्ट्रिकल फॉल्ट माना जा रहा है, हालांकि वास्तविक कारण की विस्तृत जांच अभी जारी है। अधिकारियों के अनुसार इस तरह की आग ओवरलोडिंग, खराब वायरिंग या उपकरणों के अधिक गर्म होने से भी लग सकती है।
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