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चेंबूर जल संकट विवाद: 2009 मामले में तुकाराम काटे दंपती समेत 16 आरोपियों को राहत।


मुंबई: चेंबूर में वर्ष 2009 के दौरान पानी की किल्लत को लेकर बीएमसी अधिकारियों से हुए विवाद के एक पुराने मामले में विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने पूर्व नगरसेवक व वर्तमान विधायक तुकाराम काटे, उनकी पत्नी मंगला काटे सहित कुल 16 लोगों को सभी आरोपों से बरी कर दिया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, नवंबर 2009 में चेंबूर के पंजरापोल इलाके में गंभीर जल संकट के चलते स्थानीय नागरिक तत्कालीन नगरसेवक मंगला काटे और उनके पति तुकाराम काटे के पास पहुंचे थे। इसके बाद दोनों नागरिकों के एक समूह के साथ 17 नवंबर 2009 को बीएमसी मुख्यालय पहुंचे और जल विभाग के एक वरिष्ठ अभियंता से मुलाकात की।
बताया गया कि पानी की समस्या पर हुई चर्चा के दौरान अधिकारी के जवाबों से असंतुष्ट होकर वहां मौजूद लोग आक्रोशित हो गए। आरोप था कि इस दौरान कुछ लोगों ने कार्यालय में रखे कांच के गिलास तोड़े, लकड़ी की पार्टिशन गिराई और कंप्यूटर के सीपीयू व कुर्सियों को नुकसान पहुंचाया। घटना के बाद सुरक्षा कर्मी की शिकायत पर आज़ाद मैदान पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया था।
हालांकि, मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि आरोपियों के गुस्से में होने के बावजूद किसी भी सार्वजनिक सेवक पर हमला करने की मंशा साबित नहीं होती। अदालत ने यह भी कहा कि बीएमसी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के ठोस सबूत पेश नहीं किए जा सके हैं।
इसके अलावा, अभियोजन यह भी सिद्ध करने में असफल रहा कि कथित तोड़फोड़ किस आरोपी द्वारा की गई थी। इन्हीं आधारों पर अदालत ने सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का आदेश दिया।

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