मुंबई के बोरीवली इलाके में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक फाइनेंस कंपनी में काम करने वाले वसूली एजेंट ने कर्जदार को धमकाने के लिए उसकी पत्नी की अश्लील तस्वीरें सोशल मीडिया पर फैलाकर उसे बदनाम करने की कोशिश की। पुलिस ने आरोपी की पहचान तुषार सालुंखे (23) के रूप में की है, जो नवी मुंबई का रहने वाला है।
पुलिस के अनुसार, सालुंखे एक फाइनेंस कंपनी के लोन रिकवरी विभाग में कार्यरत था और उसे ₹18,000 मासिक वेतन के अलावा वसूली पर इंसेंटिव भी मिलता था। यही इंसेंटिव पाने की लालच में उसने गैरकानूनी रास्ता अपनाया।
कर्ज न चुकाने पर दी बदनामी की धमकी
जानकारी के मुताबिक, पीड़ित 31 वर्षीय रियल एस्टेट एजेंट ने दिसंबर 2024 में एक मोबाइल ऐप के जरिए ₹1.5 लाख का पर्सनल लोन लिया था। आर्थिक तंगी के चलते वह समय पर किस्तें नहीं चुका सका। इस पर 25 अक्टूबर को आरोपी तुषार ने उसे फोन कर धमकी दी कि अगर उसने जल्द भुगतान नहीं किया, तो उसे और उसके परिवार को सोशल मीडिया पर बदनाम कर देगा।
फर्जी अकाउंट बनाकर की शर्मनाक हरकत
आरोपी ने इसके बाद पीड़ित के नाम से मिलता-जुलता एक इंस्टाग्राम अकाउंट बनाया और उस पर पीड़ित और उसकी पत्नी की मॉर्फ की गई (कंप्यूटर से बदली गई) अश्लील तस्वीरें व वीडियो अपलोड कर दिए। इतना ही नहीं, उसने इन तस्वीरों को पोर्न साइट्स से जोड़कर पीड़ित के रिश्तेदारों और दोस्तों तक भी व्हाट्सएप और सोशल मीडिया के ज़रिए भेजा। इससे पीड़ित परिवार मानसिक रूप से टूट गया।
पुलिस ने साइबर यूनिट की मदद से पकड़ा आरोपी
बोरीवली पुलिस ने डीसीपी जोन XI संदीप जाधव, सीनियर इंस्पेक्टर मधुसूदन नाइक और साइबर यूनिट प्रभारी पीएसआई कल्याण पाटिल के मार्गदर्शन में जांच शुरू की। आरोपी को उसके मोबाइल नंबर के आधार पर ट्रेस किया गया। पुलिस की कॉल मिलते ही आरोपी ने खुद थाने जाकर आत्मसमर्पण किया और अपना अपराध कबूल लिया।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि पूछताछ में सालुंखे ने कहा कि उसकी आर्थिक स्थिति खराब थी और इंसेंटिव पाने की चाह ने उसे इस रास्ते पर धकेल दिया।
देशभर में बढ़ रहे ऐसे मामले
जांच अधिकारियों का कहना है कि वसूली एजेंट्स द्वारा कर्जदारों को धमकाना, बदनाम करना या मॉर्फ तस्वीरें भेजना अब एक आम प्रवृत्ति बनती जा रही है। देश के कई हिस्सों में इस तरह की मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर लोगों ने आत्महत्या तक कर ली है।
हालांकि इस मामले में पीड़ित ने साहस दिखाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
जमानत पर रिहा, जांच जारी
पुलिस ने बताया कि यह अपराध भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita) की उन धाराओं के तहत आता है जिनमें सात साल से कम की सजा का प्रावधान है। इसलिए आरोपी को नोटिस देकर रिहा कर दिया गया है, लेकिन उसे जांच में सहयोग करने का आदेश दिया गया है।
0 टिप्पणियाँ