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बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा आदेश – गड्ढों और खुले मैनहोल से होने वाली मौतों पर अब तुरंत मिलेगा मुआवजा।


मुंबई – महाराष्ट्र में बरसात के मौसम में सड़कों पर गड्ढों और खुले मैनहोल से होने वाली दुर्घटनाओं पर सख्त रुख अपनाते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। न्यायालय ने आम लोगों को चोट लगने या मौत होने पर मुआवजा पाने के लिए एक स्पष्ट, चरणबद्ध और लागू करने योग्य प्रक्रिया निर्धारित की है।

यह आदेश न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति संदेश डी. पाटिल की खंडपीठ ने 15 अक्टूबर को पारित किया। यह मामला एक जनहित याचिका से जुड़ा है जिस पर अदालत वर्ष 2013 से लगातार नजर रख रही थी। अदालत ने कहा कि बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद हर वर्ष बरसात में गड्ढों के कारण सड़क हादसे, विशेषकर दोपहिया वाहन चालकों की मौतें, आम हो गई हैं।

अदालत ने तय की मुआवजा प्रक्रिया

न्यायालय ने यह सुनिश्चित करने के लिए कि पीड़ितों या उनके परिवारों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें, एक विस्तृत प्रक्रिया तय की है। इस प्रक्रिया के तहत दुर्घटना में घायल व्यक्ति या मृतक के परिजन सीधे मुआवजे का दावा कर सकेंगे। साथ ही लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों से वसूली की भी व्यवस्था की गई है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सड़कों की मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित सार्वजनिक प्राधिकरणों — जैसे नगर निगम, लोक निर्माण विभाग (PWD), महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC), मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) या किसी अन्य सरकारी एजेंसी — पर होती है। इसलिए दुर्घटना की जवाबदेही भी इन्हीं संस्थाओं की होगी।

पीड़ितों को क्या सबूत देने होंगे

मुआवजा प्राप्त करने के लिए आवेदक को निम्न दस्तावेज जमा करने होंगे:

  • दुर्घटना की तिथि, समय और स्थान का विवरण
  • गड्ढे या स्थल की तस्वीरें/वीडियो
  • अस्पताल या चिकित्सा रिकॉर्ड
  • पुलिस रिपोर्ट (यदि उपलब्ध हो)
  • गवाहों के बयान या वाहन मरम्मत का बिल

कहां करें शिकायत और कैसे करें आवेदन

  • शहरी क्षेत्रों के मामलों में आवेदन संबंधित नगर निगम या परिषद में किया जा सकेगा।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में शिकायत जिला कलेक्टर के पास दर्ज करनी होगी।
  • यदि सड़क लोक निर्माण विभाग, एमएसआरडीसी, एमएमआरडीए या मुंबई पोर्ट अथॉरिटी के अधीन आती है, तो शिकायत सीधे वहीं दायर की जाएगी।
  • सभी शिकायतों की एक प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) को भी भेजनी होगी।
  • डीएलएसए इन मामलों को जिला सड़क सुरक्षा एवं जवाबदेही समिति को आगे भेजेगा, जो मुआवजे और जिम्मेदारी तय करेगी।

न्याय की दिशा में बड़ा कदम

बॉम्बे हाईकोर्ट का यह आदेश सड़क दुर्घटनाओं में पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। यह फैसला न केवल नागरिकों के अधिकारों को सशक्त बनाता है, बल्कि सड़कों की सुरक्षा और सरकारी जवाबदेही को भी मजबूत करता है।


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