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बिना मंज़ूरी बिक रही 90 दवाइयाँ: देशभर के ड्रग निर्माताओं पर कसा शिकंजा।


CDSCO ने राज्यों को भेजा आपात निर्देश, बच्चों की खांसी की सिरप से लेकर डायबिटीज़ की गोलियाँ तक शामिल**
भारत के ड्रग रेगुलेटर सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) ने एक बड़ी कार्रवाई की शुरुआत करते हुए बाज़ार में बिक रही 90 अनधिकृत फिक्स्ड-डोज़ कॉम्बिनेशन (FDC) दवाओं का खुलासा किया है। इनमें कई सामान्य खांसी की सिरप, विटामिन सप्लीमेंट, एंटीफंगल क्रीम और डायबिटीज़ की गोलियाँ शामिल हैं।
18 मार्च को केंद्रीय ड्रग कंट्रोलर डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी द्वारा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ड्रग कंट्रोलरों को भेजे गए पत्र में इसे “सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा शीर्ष प्राथमिकता का मामला” बताया गया है।
SUGAM पोर्टल पर पकड़ी गई अनधिकृत दवाएँ
CDSCO ने वर्ष 2025 के लिए SUGAM पोर्टल पर जमा लैब रिपोर्टों की जांच के दौरान पाया कि बड़ी संख्या में ऐसी दवाएँ बेची जा रही हैं जिन्हें केंद्रीय मंज़ूरी कभी मिली ही नहीं। नियमों के अनुसार, 2019 के New Drugs and Clinical Trials Rules के तहत कोई भी FDC नई दवा मानी जाती है और इसके निर्माण-बिक्री से पहले केंद्र सरकार की स्वीकृति अनिवार्य है।
रेगुलेटर ने स्पष्ट कहा है कि अनधिकृत दवाओं की मौजूदगी दवाओं की गुणवत्ता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है और यह Drugs and Cosmetics Act, 1940 का सीधा उल्लंघन है।
राज्यों से कहा गया है कि सूची में दर्ज दवाओं की जांच करें, स्थानीय स्तर पर मंज़ूरी मिली है या नहीं, और संबंधित कंपनियों पर फौरन कार्रवाई करें।
कौन-कौन सी दवाएँ पाई गईं अनधिकृत?
सूची के विश्लेषण से सामने आया कि ये दवाएँ मुख्य रूप से उन श्रेणियों से हैं जिनकी खपत भारत में सबसे ज़्यादा होती है या जिन्हें डॉक्टर अक्सर लिखते हैं।
1️⃣ खांसी-जुकाम की सिरप — सबसे बड़ा समूह
करीब 14–16 दवाएँ खांसी-जुकाम वाली दवाओं की श्रेणी से हैं—
देक्सट्रोमेथॉर्फ़न, एम्ब्रॉक्सॉल, ग्वाइफेनेसिन, क्लोरफेनिरामिन, फिनाइलएफрин, टरब्यूटालीन और कई फ्लेवर्ड सिरप, खासकर बच्चों के लिए।
यहाँ तक कि बुडेसोनाइड + लेवोसैल्ब्यूटामॉल वाली इनहेलर सस्पेंशन भी शामिल है, जिसका उपयोग अस्थमा और COPD के मरीजों में होता है।
2️⃣ विटामिन और न्यूट्रिशन सप्लीमेंट — 18 से ज़्यादा कॉम्बिनेशन
– मल्टीविटामिन कैप्सूल
– आयरन-फोलिक एसिड सिरप
– कैल्शियम + विटामिन D3 + K2
– गैबापेंटिन + मिथाइलकोबालामिन (डायबिटिक न्यूरोपैथी में आमतौर पर दी जाती है)
3️⃣ एंटीफंगल और स्किन क्रीम — 10 से अधिक
कई क्रीमों में स्टेरॉयड + एंटीफंगल कॉम्बिनेशन पाया गया है। ऐसी दवाएँ पहले भी गलत इस्तेमाल और त्वचा को नुकसान पहुंचाने के कारण विवादों में रही हैं।
4️⃣ डायबिटीज़ की गोलियाँ — लगभग 6 कॉम्बिनेशन
– ग्लिमिप्राइड + मेटफॉर्मिन
– ग्लिमिप्राइड + पियोग्लिटाज़ोन
ये दवाएँ देश में सबसे ज्यादा लिखी जाने वाली एंटी-डायबिटिक दवाओं में शामिल हैं।
फार्मा हब में फैली गड़बड़ी
इन अनधिकृत दवाओं का निर्माण हिमाचल (बड्डी, सोलन), उत्तराखंड (रुड़की, हरिद्वार), गुजरात (वडोदरा, अहमदाबाद), महाराष्ट्र (मुंबई, नागपुर) और कर्नाटक (बेंगलुरु) जैसे प्रमुख फार्मा क्षेत्रों में हुआ है।
इससे साफ है कि यह समस्या किसी एक राज्य या छोटे स्तर के निर्माता तक सीमित नहीं है—बल्कि पूरे उद्योग का एक व्यापक मुद्दा है।
कड़ी कार्रवाई के संकेत
DCGI ने सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि वे सूची में शामिल सभी दवाओं की मौजूदगी की जांच करें, नमूने लें, लाइसेंस की वैधता परखें और जरूरत पड़ने पर निर्माताओं, मार्केटर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करें।
रेगुलेटर ने कहा,
“ऐसी दवाओं की बिक्री पर तत्काल रोक और सख्त निगरानी जरूरी है, ताकि जनता की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।”

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