मुंबई | संवाददाता
चुनाभट्टी की एक 75 वर्षीय महिला को पुराने सिक्कों की ऊँची कीमत दिलाने का सपना दिखाकर साइबर ठगों ने करीब 18.98 लाख रुपये की बड़ी ठगी कर ली। सोशल मीडिया पर सक्रिय ठगों ने खुद को “ओल्ड कॉइन कंपनी” के प्रतिनिधि बताकर महिला को जाल में फँसाया और कई महीनों तक पैसे ऐंठते रहे।
पुलिस के अनुसार, पीड़िता गौरी सुहास शंभू अपने पति सुहास के साथ चुनाभट्टी में रहती हैं। परिवार के पास कुछ प्राचीन भारतीय सिक्कों का संग्रह था, जो मूल रूप से सुहास की मां नलिनी शंभू ने तैयार किया था। नलिनी की 2015 में मृत्यु के बाद यह पूरा संग्रह परिवार ने संभालकर रखा था। उन्हें उम्मीद थी कि यह दुर्लभ सिक्के भविष्य में अच्छी कीमत दिला सकते हैं।
फेसबुक विज्ञापन बना ठगी का रास्ता
मई 2025 में गौरी ने फेसबुक पर एक विज्ञापन देखा, जिसमें दावा किया गया था कि कंपनी पुराने और दुर्लभ सिक्के ऊँचे दामों पर खरीद रही है। भरोसा करते हुए उन्होंने विज्ञापन में दिए नंबर पर संपर्क किया। फोन उठाने वाले व्यक्ति ने खुद को अनिल कुमार बताया और कहा कि उनकी कंपनी दुर्लभ सिक्कों का मूल्यांकन कर मोटी रकम देती है।
गौरी ने व्हाट्सऐप पर सिक्कों की तस्वीरें भेजीं, जिसके बाद ठग ने उन्हें बताया कि उनका कलेक्शन 50 से 60 लाख रुपये तक बिक सकता है। इसी बहाने उसने “रजिस्ट्रेशन फी” के नाम पर 5,000 रुपये मांगे।
इसके बाद वैल्यूएशन, प्रोसेसिंग फी, टैक्स और दस्तावेज शुल्क जैसे अलग-अलग कारणों से लगातार पैसे मांगते रहे।
मई 2025 से लेकर जनवरी 2026 के बीच महिला ने कुल 18.98 लाख रुपये तीन अलग-अलग मोबाइल नंबरों से संपर्क करने वाले व्यक्तियों को ट्रांसफर कर दिए।
आईटी विभाग भेजने की धमकी देकर दबाव बनाया
ठगी और बढ़ गई जब फरवरी–मार्च 2026 में आरोपियों ने धमकाना शुरू किया। व्हाट्सऐप कॉल पर उन्हें कहा गया कि यदि वह बाकी भुगतान नहीं करतीं, तो “इनकम टैक्स विभाग” उनके घर छापा मार देगा और कानूनी कार्रवाई होगी।
यह धमकियाँ सुनकर बुजुर्ग दंपती भयभीत हो गए और मानसिक दबाव में रहे।
पुलिस में शिकायत, मामला दर्ज
जब अंततः गौरी को अहसास हुआ कि वह एक बड़े साइबर गैंग का शिकार हो चुकी हैं, तो उन्होंने चुनाभट्टी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने अनिल कुमार और संजय जी नाम से परिचय देने वाले अज्ञात लोगों पर आरोप लगाया, जो तीन विभिन्न नंबरों से संपर्क कर रहे थे।
पुलिस ने मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया है। जांच जारी है और पुलिस ने ठगों के मोबाइल नंबरों का डेटा जुटाना शुरू कर दिया है।
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