पुणे/मुंबई:
पुणे नगर निगम चुनाव को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों गुटों के बीच संभावित गठबंधन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। शरद पवार के नेतृत्व वाले एनसीपी (एसपी) में इस मुद्दे पर विरोधाभासी बयान सामने आए हैं, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
एनसीपी (एसपी) की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने मुंबई में स्पष्ट किया कि अजित पवार के नेतृत्व वाले एनसीपी गुट के साथ किसी भी प्रकार के गठबंधन को लेकर उनकी पार्टी को अब तक कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर फिलहाल कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है।
हालांकि, इसी बीच एनसीपी (एसपी) के वरिष्ठ नेता अंकुश काकड़े ने दावा किया कि दोनों गुटों के बीच पुणे नगर निकाय चुनाव एक साथ लड़ने को लेकर सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है। काकड़े के अनुसार, इस संबंध में दोनों पक्षों के तीन-तीन नेताओं की एक बैठक भी हुई, जिसमें विस्तार से चर्चा की गई।
उन्होंने बताया कि एनसीपी (एसपी) के पुणे शहर अध्यक्ष प्रशांत जगताप इस बैठक में शामिल नहीं हो सके, क्योंकि वे किसी अन्य कार्य से मुंबई में थे। काकड़े ने यह भी कहा कि गठबंधन को लेकर पार्टी के अन्य नेताओं से अभी सलाह-मशविरा जारी है।
काकड़े के मुताबिक, एनसीपी (एसपी) की प्राथमिकता महा विकास आघाड़ी (एमवीए) के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की है, ताकि पुणे में भाजपा को सत्ता से दूर रखा जा सके। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस से चर्चा कर अजित पवार गुट को एमवीए में शामिल करने पर विचार किया जा सकता है, हालांकि अजित पवार की पार्टी फिलहाल राज्य में भाजपा के साथ सत्ता में है।
इन दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए सुप्रिया सुले ने दोहराया कि गठबंधन को लेकर कोई भी निर्णय सभी सहयोगी दलों से चर्चा के बाद ही लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि एमवीए में इस विषय पर पहले ही कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं और बिना सामूहिक सहमति के कोई कदम नहीं उठाया जाएगा।
इस बीच, प्रशांत जगताप के पार्टी से इस्तीफे की अटकलों पर भी सुप्रिया सुले ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि न तो उन्हें और न ही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे को ऐसा कोई इस्तीफा प्राप्त हुआ है।
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