मुंबई | एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने मुंबई में एक सनसनीखेज मामले का खुलासा किया है, जिसमें एक सिविल क्लर्क-कम-टाइपिस्ट को ₹15 लाख की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया है। हैरानी की बात यह है कि क्लर्क यह रकम कथित तौर पर एक अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के लिए वसूल रहा था। यह मामला एक ज़मीन विवाद में अनुकूल आदेश दिलाने के बदले रिश्वत लेने का है।
एसीबी के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी की पहचान चंद्रकांत वासुदेव के रूप में हुई है, जो मंगलवार को पकड़ा गया। इस मामले में मजगांव सिविल कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एजाजुद्दीन सलाउद्दीन काज़ी को भी वांछित आरोपी के रूप में नामित किया गया है।
अधिकारियों के अनुसार, यह हाल के वर्षों में पहला ऐसा मामला है, जिसमें किसी अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पर भ्रष्टाचार निरोधक कानून (Prevention of Corruption Act) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
₹25 लाख की मांग, ₹15 लाख पर तय हुआ सौदा
एसीबी ने बताया कि शिकायतकर्ता की पत्नी ने कंपनी की ज़मीन पर जबरन कब्जे के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस दौरान आरोपी क्लर्क ने ₹25 लाख की रिश्वत की मांग की थी, जिसे बाद में घटाकर ₹15 लाख कर दिया गया।
बताया गया है कि ₹25 लाख में से ₹10 लाख वासुदेव का हिस्सा था, जबकि ₹15 लाख न्यायाधीश काज़ी के लिए तय किए गए थे।
शिकायतकर्ता ने की एसीबी से संपर्क
9 सितंबर 2025 को वासुदेव ने शिकायतकर्ता के सहयोगी से कोर्ट में संपर्क किया और बाद में चेम्बूर के एक कॉफी शॉप में मुलाकात कर रिश्वत की मांग दोहराई। शिकायतकर्ता ने रकम देने से इनकार किया और बाद में एसीबी से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई।
एसीबी के निर्देश पर शिकायतकर्ता ने वासुदेव से दोबारा मुलाकात की और ₹15 लाख देने की बात मानी। इसी दौरान वासुदेव ने कथित तौर पर जज काज़ी को फोन कर भुगतान की जानकारी दी, जिस पर जज ने रिश्वत स्वीकार करने की पुष्टि की।
एसीबी ने दबोचा आरोपी
एसीबी टीम ने मौके पर जाल बिछाकर वासुदेव को रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल वासुदेव को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है, जबकि न्यायाधीश एजाजुद्दीन काज़ी अभी फरार हैं।
एसीबी अधिकारियों ने बताया कि मामले की आगे की जांच जारी है।
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