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लोकल ट्रेनें बनीं ठग सिंडिकेट का निशाना: रेलवे पुलिस ने अवैध पोस्टर चिपकाने वाले गिरोह का किया भंडाफोड़, 5 गिरफ्तार।


मुंबई की लोकल ट्रेनों में सफर करते समय दीवारों और दरवाज़ों पर चिपके भ्रामक विज्ञापन अक्सर आपकी नज़र में आते होंगे—कहीं कोई “बंगाली बाबा” समस्याएं दूर करने का दावा करता मिलता है, तो कहीं कम कीमत में घर दिलाने का लालच। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये पोस्टर आखिर लगाता कौन है? दरअसल, यह एक संगठित ठग सिंडिकेट का हिस्सा है, जो भोले-भाले यात्रियों को जाल में फंसाने के लिए इन विज्ञापनों का इस्तेमाल करता है।

इसी कड़ी में मुंबई रेलवे पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए ऐसे ही सिंडिकेट के पांच सदस्यों को नायगांव से गिरफ्तार किया है। ये सभी अवैध रूप से लोकल ट्रेनों में पोस्टर चिपका रहे थे।

स्पेशल टीम की कार्रवाई में हुआ भंडाफोड़
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुंबई सेंट्रल के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने एक विशेष टीम गठित की थी। टीम की कमान सीनियर पीआई संतोष सोनी और एएसआई शीतला सिंह के हाथों में थी। यह टीम सोमवार दोपहर करीब 3.50 बजे नायगांव स्टेशन से चलने वाली लोकल ट्रेन में गश्त पर थी, तभी पांच युवक डिब्बों में भ्रामक पोस्टर चिपकाते हुए पकड़े गए।

60 हजार से अधिक अवैध पोस्टर बरामद
आरोपियों के बैगों की तलाशी लेने पर पुलिस को 60,000 से अधिक अवैध पोस्टर मिले, जिन्हें विभिन्न ट्रेनों और स्टेशनों पर लगाने की तैयारी चल रही थी। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अभिषेक पांडे, धर्मराज पांडे, ऋतिक कलवर, अमित प्रजापति और रितेश जिम्बल के रूप में हुई है। सभी आरोपी नालासोपारा और बोइसर इलाके के रहने वाले बताए जाते हैं।

जांच में पता चला कि रितेश जिम्बल नालासोपारा में सब्जी की दुकान चलाता है, जहां ये सभी पोस्टर पहले जमा किए जाते थे। इसके बाद बाकी चार आरोपी मौके देखकर ट्रेनों में पोस्टर चिपकाने का काम करते थे, जबकि अमित प्रजापति लगाए गए पोस्टरों को चेक करता था, ताकि कहीं कोई छूट न जाए।

मूल मास्टरमाइंड की तलाश जारी
रेलवे पुलिस की जांच अब उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जो इन पोस्टरों को छपवाकर लगाने का काम करवाते हैं। पुलिस का मानना है कि यह एक बड़ा सिंडिकेट है, जिसकी जड़ें लोकल ट्रेनों के ज़रिए शहर भर में फैल चुकी हैं।

रेलवे पुलिस ने यात्रियों से अपील की है कि ऐसे भ्रामक विज्ञापनों से दूर रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत रेलवे हेल्पलाइन पर दें।


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