मुंबई में इन दिनों 'डिजिटल गिरफ्तारी' (Digital Arrest) के नाम पर की जा रही ऑनलाइन ठगी तेजी से बढ़ रही है, जिसका सबसे अधिक शिकार अकेले रहने वाले वरिष्ठ नागरिक बन रहे हैं। इस बढ़ते खतरे को देखते हुए मुंबई पुलिस ने शहर में अकेले रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों का विशेष डाटाबेस तैयार किया है और पुलिस टीमें उनके घर जाकर सतर्कता अभियान चला रही हैं।
कानून में ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ जैसा कोई प्रावधान नहीं है, लेकिन ठग खुद को CBI, ED जैसी एजेंसियों का अधिकारी बताकर वरिष्ठ नागरिकों को फोन करते हैं और यह कहकर डराते हैं कि उनका बैंक खाता किसी अपराध में इस्तेमाल हुआ है। इसके बाद उन्हें घंटों तक फोन पर रोककर मानसिक दबाव में रखा जाता है, जिसे वे 'डिजिटल गिरफ्तारी' बताते हैं।
एक अधिकारी के अनुसार जनवरी से अक्टूबर 2025 के बीच शहर में ऐसे 142 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें ₹114 करोड़ की भारी-भरकम ठगी हुई है। इनमें से ज्यादातर मामले ऐसे वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े हैं जो अकेले रहते हैं। ठग उन्हें धमकाते हैं कि वे इस ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ की जानकारी किसी को न दें।
पुलिस ने इस पहल की शुरुआत दक्षिण मुंबई से की है, जहां सर्वे में 627 वरिष्ठ नागरिक ऐसे पाए गए जो अकेले रह रहे हैं। ज़ोन-1 के तहत करीब 25 अधिकारी और 27 कॉन्स्टेबल घर-घर जाकर उन्हें इस नए प्रकार की साइबर ठगी के बारे में समझा रहे हैं।
एक अधिकारी ने बताया, “हमने उन्हें अलग-अलग भाषाओं में जागरूकता पर्चे भी दिए हैं, ताकि वे खुद पढ़कर समझ सकें और अपने आसपास के लोगों को भी इस तरह की ठगी से बचा सकें।”
मुंबई पुलिस का मानना है कि समय रहते जागरूकता फैलाना ही इस साइबर अपराध से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।
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