मुंबई के ऐतिहासिक टाउन हॉल में इस सप्ताहांत एक दिलचस्प जंग देखने को मिलेगी — यह युद्ध कुरुक्षेत्र का नहीं, बल्कि एशियाटिक सोसायटी ऑफ बॉम्बे के चुनाव का है। 220 साल पुराने इस भवन की सीढ़ियाँ, स्तंभ और लकड़ी के फर्श अब बन गए हैं राजनीति के नए रणभूमि, जहां कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने हैं।
इस चुनाव में दो दिग्गज नेता विनय सहस्रबुद्धे (भाजपा) और कुमार केतकर (कांग्रेस) अध्यक्ष पद के लिए भिड़ने वाले हैं। इनके अलावा सात स्वतंत्र उम्मीदवार भी मैदान में हैं, जो खुद को ‘गैर-दलित, निष्पक्ष और सुधारवादी’ बता रहे हैं।
चुनाव की तारीख और पद
चुनाव शनिवार, 8 नवंबर को दोपहर 1:30 से शाम 6:30 बजे तक होंगे। इसमें 2025-2027 कार्यकाल के लिए पदाधिकारी चुने जाएंगे —
- अध्यक्ष: 1
- उपाध्यक्ष: 4
- मानद सचिव: 1
- प्रबंध समिति सदस्य: 5 (तीन वर्ष के लिए)
- एक अतिरिक्त सदस्य (2025–27)
- जांच समिति के 7 सदस्य
इस बार कुल 13 उम्मीदवार उपाध्यक्ष पद, 2 मानद सचिव पद, 16 सदस्य प्रबंध समिति के 6 पदों के लिए, और 12 उम्मीदवार जांच समिति के लिए मैदान में हैं।
सदस्यता विवाद ने बढ़ाई गरमी
हाल ही में करीब 1000 नए सदस्यों की वृद्धि के बाद मतदान पात्रता को लेकर विवाद खड़ा हो गया। चैरिटी कमिश्नर ने पहले 15 अक्टूबर को कट-ऑफ तारीख तय की थी, जिसे बाद में 3 अक्टूबर किया गया। इस फैसले के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की गई और अदालत ने अब कमिश्नर का आदेश रद्द कर दिया है।
विरासत की चिंता
राजनीतिक हलचल के बीच, सदस्य इस बात पर भी जोर दे रहे हैं कि टाउन हॉल भवन की हालत बेहद खराब हो चुकी है। लाइब्रेरी के बेसमेंट में रखी महाभारत (फ़ारसी में) और दांते की डिवाइन कॉमेडी जैसी दुर्लभ पांडुलिपियाँ तत्काल मरम्मत की मांग कर रही हैं।
प्रमुख उम्मीदवारों का दृष्टिकोण
कुमार केतकर (कांग्रेस) का प्रचार अभियान ‘सेव एशियाटिक लाइब्रेरी’ के नारे पर केंद्रित है। उन्होंने कहा,
“हमारा लक्ष्य है कि इस ऐतिहासिक संस्था की गौरवशाली परंपरा को सहेजते हुए उसे आधुनिक युग से जोड़ा जाए। हमें इसे एक वैश्विक स्तर की संस्था बनाना है, जहां विचारक, कलाकार, वैज्ञानिक और विद्वान एक साथ काम कर सकें।”
वहीं, विनय सहस्रबुद्धे (भाजपा) का फोकस संस्था के पुनरुत्थान पर है। उन्होंने कहा,
“यह केवल पुनर्स्थापन का नहीं, बल्कि पुनर्जीवन का प्रयास है। हम इसे वैश्विक पहचान दिलाने के लिए डिजिटलीकरण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाएंगे।”
दोनों पैनलों की ताकत
केतकर पैनल में शामिल हैं —
- डॉ. ए.डी. सावंत (पूर्व प्रो-वाइस चांसलर, मुंबई विश्वविद्यालय)
- कवि और दलित पैंथर संस्थापक अर्जुन डांगले
- डॉ. दीपक टी. पवार (मुंबई विश्वविद्यालय)
- सुनील कदम (समिति सदस्य)
विनय सहस्रबुद्धे पैनल में हैं —
- पद्मश्री रमेेश पाटणगे (लेखक)
- डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी (अभिनेता-निर्देशक, ‘चाणक्य’ फेम)
- नितीश भारद्वाज (‘कृष्ण’ फेम अभिनेता)
- डॉ. संजय देशमुख (पूर्व कुलपति, मुंबई विश्वविद्यालय)
- विवेक गणपुले (मानद सचिव प्रत्याशी)
स्वतंत्र उम्मीदवारों की भूमिका
सात स्वतंत्र प्रत्याशी भी मैदान में हैं जो किसी दल या समूह से जुड़ाव न रखते हुए सुधार और पारदर्शिता की बात कर रहे हैं। एक स्वतंत्र उम्मीदवार ने कहा,
“हम किसी विचारधारा या भाषा के आधार पर नहीं, बल्कि हर सदस्य की आवाज़ बनकर काम करना चाहते हैं।”
कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं
भाजपा नेता माधव भंडारी, जो प्रबंध समिति के लिए चुनाव लड़ रहे हैं, ने कहा,
“हमारा उद्देश्य केवल शोध को सार्वजनिक बनाना और युवाओं को जोड़ना है। इस संस्था का राजनीतिकरण करना हमारा मकसद नहीं है।”
चुनाव का सारांश
| पद | उम्मीदवारों की संख्या |
|---|---|
| अध्यक्ष | 2 |
| उपाध्यक्ष | 13 |
| मानद सचिव | 2 |
| प्रबंध समिति (6 पद) | 16 |
| जांच समिति (7 पद) | 12 |
मुंबई का यह चुनाव सिर्फ एक संस्था का नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और बौद्धिक स्वतंत्रता की दिशा तय करने वाला संग्राम बन गया है — और इस बार युद्ध का मैदान है टाउन हॉल का प्राचीन आंगन।
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