मुंबई,
भारतीय रेलवे द्वारा यात्रियों की सुविधा के लिए शुरू की गई तत्काल टिकट सेवा अब यात्रियों की बजाय दलालों के लिए मुनाफे का जरिया बन गई है। जहां आम यात्री टिकट बुक करने में 1 से 2 मिनट का समय लेते हैं, वहीं दलाल अब सिर्फ 10 से 15 सेकंड में पूरे कोटे के टिकट हड़प रहे हैं। रेलवे की वेबसाइट पर टिकट सेकंडों में खत्म होने से यात्रियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
अनधिकृत ऐप्स से रेलवे सिस्टम को चकमा
रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की जांच में खुलासा हुआ है कि बाजार में कई अनधिकृत ऐप्स जैसे Tesla, Avengers और Dr. Doom सक्रिय हैं, जो यात्रियों की जानकारी पहले से लेकर बुकिंग के समय स्वचालित रूप से टिकट कंफर्म कर देते हैं। ये ऐप्स न केवल रेलवे के बुकिंग सिस्टम को चकमा देते हैं, बल्कि तत्काल टिकटों की ब्लैक मार्केटिंग को भी बढ़ावा दे रहे हैं।
कैसे होता है खेल
इन ऐप्स के जरिए दलाल पहले से यात्रियों की जानकारी—नाम, उम्र और यात्रा विवरण—भर देते हैं। जैसे ही बुकिंग का समय शुरू होता है, ऐप्स बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के टिकट ऑटोमैटिक बुक कर लेते हैं। यही वजह है कि आम लोगों के पास टिकट पाने का मौका ही नहीं बचता।
आरपीएफ की कार्रवाई जारी
मुंबई के वरिष्ठ संभागीय सुरक्षा आयुक्त ऋषि शुक्ला के अनुसार, RPF लगातार ऐसे ऐप्स और दलालों पर निगरानी रख रही है। कई दलाल और ऐप डेवलपर अब तक गिरफ्तार किए जा चुके हैं। हालांकि, OTP और Captcha जैसी सुरक्षा प्रणाली के बावजूद ये अनधिकृत सिस्टम इन्हें बायपास कर लेते हैं, जिससे रेलवे के लिए इन पर पूरी तरह लगाम लगाना चुनौती बना हुआ है।
मुनाफे का खेल: 800 रुपये के टिकट पर 2000 तक वसूली
जानकारी के अनुसार, इन ऐप्स की पहुंच सुपर सेलर्स तक होती है, जो इन्हें ₹1,500 से ₹2,500 प्रतिमाह में बेचते हैं। दलाल एक सामान्य स्लीपर टिकट जो ₹800 का होता है, उसे ₹2,000 तक में बेच देते हैं। वहीं थर्ड एसी टिकट जिसकी कीमत ₹2,300 होती है, त्योहारों के सीजन में ₹4,000 तक में बेचा जा रहा है।
फर्जी पहचान पत्रों की बढ़ती मांग
आधार सत्यापन अनिवार्य होने के बाद फर्जी पहचान पत्रों का भी काला बाजार बढ़ गया है। पहले फर्जी आईडी ₹30 में मिल जाती थी, लेकिन अब इसका दाम ₹500 तक पहुंच गया है। RPF ने इस साल 10 और पिछले साल 25 से अधिक ऐसे मामले दर्ज किए हैं। अब तक करीब 50 आरोपी—जिनमें दलाल, ऐप डेवलपर और सुपर सेलर्स शामिल हैं—गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
रेलवे के सामने बड़ी चुनौती
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की सुविधा के लिए कई तकनीकी सुधार किए जा रहे हैं, लेकिन बाजार में इन अनधिकृत ऐप्स की उपलब्धता और तकनीकी चालाकी के कारण यह समस्या अभी भी गंभीर बनी हुई है।
निष्कर्ष:
जहां रेलवे ने तत्काल टिकट सेवा को यात्रियों के लिए राहत के रूप में शुरू किया था, वहीं अब यह सुविधा दलालों के लिए सोने की खान साबित हो रही है। यात्रियों को अब उम्मीद है कि रेलवे जल्द ही इस जाल को तोड़ने के लिए कड़े और तकनीकी कदम उठाएगा।
0 टिप्पणियाँ