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दाऊद इब्राहिम की पुश्तैनी जमीनों की नीलामी पूरी: वर्षों से अटकी प्रक्रिया में बड़ी सफलता।


रिपोर्ट:  | मुंबई | 19 मार्च 2026
कुख्यात अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से जुड़ी संपत्तियों की नीलामी को लेकर केंद्र सरकार को आखिरकार बड़ी सफलता मिली है। लंबे समय से कानूनी और सामाजिक बाधाओं में फंसी हुई यह प्रक्रिया गुरुवार को पूरी हुई, जब मुंबई के एक बोलीदाता ने चार कृषि भूखंडों पर सबसे ऊंची बोली लगाकर नीलामी जीत ली। इन प्लॉट्स की बिक्री SAFEMA (Smugglers and Foreign Exchange Manipulators Act) के तहत की गई है।
1993 मुंबई धमाकों के बाद जब्त की गई थीं जमीनें
रत्नागिरी जिले के खेड तालुका के मुंबा गांव में स्थित ये चार कृषि भूमि के टुकड़े 1990 के दशक में कास्कर परिवार से जब्त किए गए थे। 1993 मुंबई बम धमाकों के बाद, संगठित अपराध के खिलाफ केंद्र सरकार की कार्रवाई के तहत इन संपत्तियों को सरकारी नियंत्रण में ले लिया गया था। इनमें से कई जमीनें दाऊद की मां अमीना बी के नाम पर दर्ज थीं।
नीलामी की राह आसान नहीं थी
इन जमीनों की नीलामी पिछले कई वर्षों से अधर में अटकी हुई थी।
लोगों में डी-कंपनी के नाम का डर,
खेतिहर जमीन होने के कारण केवल कृषि उपयोग की बाध्यता,
और कागज़ी कार्रवाई संबंधी जटिलताएं
इन सब कारणों से बार-बार नीलामी प्रक्रिया अधूरी रह जाती थी। 2017, 2020, 2024 और 2025 में सरकार ने प्रयास किए, लेकिन एक भी खरीदार सामने नहीं आया।
कौन है नया खरीदार?
नीलामी जीतने वाले बोलीदाता का नाम नियमों के अनुसार अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
खरीददार को अप्रैल 2026 की शुरुआत तक पूरी राशि जमा करनी होगी। उसके बाद संबंधित प्राधिकरण की अंतिम स्वीकृति के बाद ही जमीनों का हस्तांतरण किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में किसी विवाद से बचने के लिए सभी दस्तावेज और कानूनी जांच बेहद सख्ती से की जा रही है।
कौन सा प्लॉट सबसे अधिक चर्चा में रहा?
चर्चा का केंद्र बना सर्वे नंबर 442 (हिस्सा 13-B)।
आरक्षित मूल्य: ₹9.41 लाख
अंतिम बोली: ₹10 लाख से अधिक
इस जमीन के लिए मुंबई और रत्नागिरी से दो बोलीदाताओं के बीच प्रतिस्पर्धा रही।
बाकी तीन प्लॉट — सर्वे 533, 453 और 61 — एक ही खरीदार ने खरीदे।पहले भी दाऊद की संपत्तियां बिक चुकी हैं
दिल्ली के वकील अजय श्रीवास्तव पहले भी चर्चा में आए थे, जब उन्होंने 2001 में नागपाड़ा स्थित दो यूनिट खरीदी थीं, जिनका कब्जा उन्हें आज तक नहीं मिल पाया है। मामला वर्तमान में बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित है।
वर्ष 2020 में उन्होंने मुंबा गांव स्थित दाऊद का पैतृक घर भी खरीदा था।
हालांकि 2024 में एक छोटे प्लॉट के लिए उनकी ₹2.01 करोड़ की बोली भुगतान न करने के कारण रद्द कर दी गई थी।
सरकार के लिए अहम जीत
दाऊद इब्राहिम की संपत्तियों की नीलामी सिर्फ राजस्व का मामला नहीं, बल्कि संगठित अपराध के खिलाफ प्रतीकात्मक जीत मानी जा रही है। वर्षों से अटकी प्रक्रिया का पूरा होना उन सभी मामलों के लिए मिसाल है, जहां अपराधियों की संपत्तियां कानूनी विवादों और सामाजिक डर के कारण बिक नहीं पातीं।

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