अंधविश्वास की आड़ में महिलाओं का शोषण और करोड़ों की ठगी का नेटवर्क ध्वस्त**
नासिक में स्वयंभू ज्योतिषी बने अशोक खरात उर्फ ‘कैप्टन खरात’ की गिरफ्तारी के बाद पूरा मामला नए मोड़ लेता जा रहा है। कथित ज्योतिष और चमत्कार दिखाने के नाम पर महिलाओं को जाल में फंसाकर शोषण करने और लोगों से करोड़ों की ठगी करने के आरोपों में क्राइम ब्रांच की जांच लगातार गहराती जा रही है। पुलिस हिरासत में लिए गए खरात से पूछताछ के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं।
आस्था के नाम पर महिलाओं का शोषण — गंभीर आरोपों की जांच जारी
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने खुद को ज्योतिष और आध्यात्मिक शक्तियों वाला गुरु बताकर कई महिलाओं को अपनी 'साधना' में शामिल करवाया। शिकायतों में दावा किया गया है कि इसी बहाने वह महिलाओं का शोषण करता था। पीड़िताओं के सामने आने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया है।
राजनीति और हस्तियों तक पहुंच का इस्तेमाल
अशोक खरात की कई प्रभावशाली नेताओं और सोशल मीडिया हस्तियों के साथ तस्वीरें भी सामने आई हैं। बताया जाता है कि वह बड़े नेताओं का भविष्य बताने का दावा करता था। 2022 में मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद वह अचानक सुर्खियों में आ गया था।
यह भी आरोप है कि उसकी लोकप्रियता बढ़ाने में कुछ पद पर बैठे लोग भी शामिल थे। गिरफ्तारी के बाद उसके समर्थन में सामने आए वीडियो ने महाराष्ट्र महिला आयोग की तत्कालीन अध्यक्ष को भी पद छोड़ने पर मजबूर कर दिया।
‘चमत्कार’ दिखाने का एक पूरा फर्जी सिस्टम था तैयार
जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी के आश्रम में चमत्कार दिखाने के लिए हाई-टेक व्यवस्था बनाई गई थी।
रिमोट-कंट्रोल वाले सांपों से डर फैलाता था
मंदिर परिसर में छिपाए गए नकली सांपों को रिमोट से चलाया जाता था, जिससे श्रद्धालु इसे चमत्कार समझकर घबरा जाते थे। नकली बाघ की खाल और अघोरी साधना जैसा माहौल तैयार करके वह खुद को शक्तिशाली बाबा साबित करता था।
सम्मोहन और तांत्रिक विधियों का झांसा
सम्मोहन, अघोरी साधना और ग्रह-दोष दूर करने के नाम पर वह भारी रकम वसूलता था। पुलिस ने बताया कि उसके पास से तांत्रिक अनुष्ठानों में उपयोग होने वाला काफी सामान मिला है, जिसकी वास्तविकता संदिग्ध है।
महंगे रत्न और ‘दैवीय वस्तुएँ’ बेचकर करोड़ों की ठगी
अशोक खरात के नेटवर्क द्वारा लोगों से आर्थिक ठगी के भी कई तरीके अपनाए जाते थे—
साधारण इमली के बीज (चिंचोके) को पॉलिश कर 'दुर्लभ दिव्य बीज' बताकर ₹10,000 से ₹1 लाख तक में बेचा जाता था।
सस्ते पत्थरों को ‘दुर्लभ रत्न’ बताकर उनकी भारी कीमत वसूली जाती थी।
ग्रह-नक्षत्र सुधार और यज्ञ के नाम पर पैकेज बनाकर लोगों से मोटी रकम ली जाती थी।
नासिक क्राइम ब्रांच ने कहा है कि यह एक सुनियोजित आर्थिक धोखाधड़ी का रैकेट था, जिसमें कई लोग शामिल हो सकते हैं। अब पुलिस सभी लेन-देन और संपत्तियों की जांच कर रही है।
जांच गहराई, और भी खुलासे होने की संभावना
अशोक खरात की गिरफ्तारी ने अंधविश्वास के सहारे चल रहे एक बड़े नेटवर्क को उजागर किया है। पुलिस का कहना है कि अब तक सामने आए खुलासे सिर्फ शुरुआत हैं।
जैसे-जैसे पीड़ित सामने आएँगे, यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है।
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